@मानवाधिकार रूपी देवता केवल पुलिस विभाग पर ही लागू हैं तथा ये सफेदपोश भी केवल पुलिस विभाग पर ही अपना गुस्सा झाड़ते हैं ।
और मुझे शर्म इस बात की आ रही है कि पुलिस मे अधिकारी कोई अच्छे आते हैं उनके अधीन पुलिसकर्मियों द्वारा राजनीतिक एप्रोच लगाया जाकर ईमानदार छवि के अधिकारी के मंसूबो पर पानी फेर देते हैं ।
यदि थानाधिकारियों द्वारा सफेदपोशों की बातों को ध्यान नहीं दिया जाये तो फिर देखिए पुलिस की इज्जत कैसे चमकती हैं ।
आज तो स्थिति यह हैं कि कोई थानाधिकारी लगते ही पहले रिपोर्ट सफेदपोश को करते हैं, फिर पुलिस के भय का सवाल ही पैदा नहीं होता क्योंकि अधिकांश आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को राजनीतिक सह प्राप्त होता हैं ।
जालोर मे करड़ा थानाधिकारी श्री चैनप्रकाश द्वारा तीन महिने तक हल्के के विधायक से बात नहीं की और अगले महिने विधायक साहब ने एसपी साहब को थानाधिकारी को हटाने के लिए कहा लेकिन टाईगर साहब खुद ईमानदार छवि के होने से उन पर भी विधायक जी का कोई असर नहीं हुआ ।अतंत सीधे आईजी साहब से स्थानांतरण आदेश करवा दिया और नये थानाधिकारी साहब ने आमद करवाते ही सीधे विधायक की चौखट पर पहुँच गये।
यह हैं अपनी पुलिस, काश नये थानेदार भी सफेदपोशों के चक्कर मे नहीं आते तो वो किन किन को हटाते, आखिर मे उनको ही हार माननी पड़ती ।
पुलिस मे मैंने देखा हैं अधिकतर की यही सोच रही है कि अपना काम बन जाये ,बस यही सोच पुलिस को कमजोर कर रही हैं ।
बात कड़वी हैं लेकिन सच हैं -
आज से दस वर्ष पहले पुलिस के पास नफरी और संसाधनों का अभाव था लेकिन पुलिस बहुत कम पिटती थी और आज नफरी भी अच्छी साधन भी हैं मगर पुलिस पिट रही हैं, पुलिस की गाड़ियों को टक्कर मारना, छीनना ऐसी घटनाएँ अपराधी खुलेआम कर रहे हैं क्या पुलिस इतनी कमजोर हो गई हैं कि खुद की रक्षा भी नहीं कर रही हैं, नहीं मेरी पुलिस कमजोर नहीं हैं कमजोर करने वाले वो शख्स हैं जो खाकी को दागदार करने मे लगे हैं और लोगों के सामने हाथ फैला रहे हैं वो अपनी पुलिस मे जब तक मौजूद रहेंगे और जब तक हमारा जमीर औरों के पास गिरवी रहेगा तब तक हम पुलिस के लिए अच्छा कभी नहीं कर सकते ।
आइये हम सब मिलकर यह कसम खाये कि जब भी हमारी पुलिस संकट मे होगी तब हम पीछे नहीं हटेंगे और अपना जमीर नहीं बेचेगें।
बुधवार, 24 जनवरी 2018
न्यूज़ रिपोर्टर
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