बैंक में खाता होना ही मुसीबत, बचत खातों में न्यूनतम राशि सीमा खत्म, चुकाना पड़ेगा 5 साल का टेक्स - राजस्थान उदय न्यूज़

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बुधवार, 25 अप्रैल 2018

बैंक में खाता होना ही मुसीबत, बचत खातों में न्यूनतम राशि सीमा खत्म, चुकाना पड़ेगा 5 साल का टेक्स

बैंक में खाता होना ही मुसीबत, बचत खातों में न्यूनतम राशि सीमा खत्म, चुकाना पड़ेगा 5 साल का टेक्स


By JJ MODRAN  
On अप्रैल 25, 2018




MinimumBank Deposit Limit हो सकता है कि अब खाते में औसत न्यूनतम राशि रखने के बाद भी एटीएम ट्रांजैक्शन, फ्यूल सरचार्ज रिफंड, चेक बुक, डेबिट कार्ड आदि की सेवाएं फ्री नहीं मिल पाएंगी।
दरअसल, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स इंटेलिजेंस (डीजीजीएसटी) ने एसबीआइ , एचडीएफसी, आइसीआइसीआइ, ऐक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे देश के बड़े बैंकों से खाते में न्यूनतम राशि (मिनिमम अकाउंट बैलेंस ) रखने वाले ग्राहकों को मुफ्त में दी गई सेवाओं पर टैक्स चुकाने को कहा है। डीजीजीएसटी ने इन बैंकों को इस मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस दूसरे बैंकों को भी भेजा जा सकता है। हालांकि, बैंक इस मामले में डीजीजीएसटी के दावे को चुनौती दे सकते हैं और वे इस पर सरकार से भी अपील करेंगे।

5 वर्ष की अवधि का टैक्स
इस मामले से वाकिफ एक बड़े टैक्स अधिकारी ने बताया कि पिछले पांच साल के लिए टैक्स भुगतान की मांग की गई है क्योंकि नियम के मुताबिक पांच साल से पहले सर्विस टैक्स नहीं मांगा जा सकता है।
ये बनाया है आधार
जिन खाते में न्यूनतम राशि रखी जा रही है उन पर टैक्स की मांग उसी आधार पर की गई है जिस आधार पर बैंक मिनिमम बैलेंस मेनटेन नहीं करने वाले ग्राहकों से चार्ज लेते हैं। यानी, मिनिमम अकाउंट बैलेंस मेनेटन नहीं करनेवाले ग्राहकों से बैंक जितनी रकम जुर्माने के रूप में वसूलते हैं, मिनिमम बैलेंस मेनटेन करनेवाले हर अकाउंट पर भी उतनी ही रकम जोड़कर टैक्स की गणना।
ग्राहकों पर पड़ेगा बोझ बैंक इससे चिंतित हैं क्योंकि वे पिछली तारीख से ग्राहकों से टैक्स की मांग नहीं कर सकते। अगर इस टैक्स को बहाल रखा जाता है तो आगे चलकर इसका बोझ ग्राहकों को उठाना पड़ेगा।
इन छूटों पर नजर
बैंक कुछ सेवाओं के शुल्क वसूलते हैं या मिनिमम बैलेंस रखने पर मुफ्त सेवाएं दी जाती हैं। फी बेस्ड सर्विस में तय सीमा से अधिक एटीएम ट्रांजैक्शंस, फ्यूल सरचार्ज रिफंड, चेक बुक इशू करने, डेबिट कार्ड आदि शामिल हैं। खाते में न्यूनतम राशि रखने पर उनसे ये चार्ज नहीं लिए जाते हैं।

बैंकों को देना पड़ सकता है 60 अरब रूपए
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बैंकों पर कुल टैक्स लायबिलिटी (देनदारी) 6,000 करोड़ रुपए की हो सकती है, लेकिन बैंकों का मानना है कि वास्तविक रकम इससे ज्यादा होगी।