जालौर जिले में "देवनगरी नगरी" के नाम से विख्यात हे दांतवाङा गांव - राजस्थान उदय न्यूज़

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सोमवार, 22 मई 2017

जालौर जिले में "देवनगरी नगरी" के नाम से विख्यात हे दांतवाङा गांव

रानीवाङा. निकटवर्ती देवनगरी दांतवङा मे स्थित खेतलाजी मंदिर मे गांव के छत्तीस कॉम के द्वारा एक रात्रि भव्य जागरण और दूसरे दिन समुचे गांव के महाप्रसाध्दी का आयोजन किया गया। जिसमें देवनगरी दांतवाङा गांव के छत्तीस कॉम के लोगो ने भाग लिया एवं समुचे गांव को हर्षोल्लासित कर दिया। ग्रामीण जामताराम देवासी ने बताया कि देवनगरी दांतवाङा गाँव में सभी देवी देवताऔ के बङे - बङे मंदिर हे जिसमें जलाधंरनाथ जी मंदिर, रामदेव जी का मंदिर, कुङेश्वर महादेव मंदिर, मेथेश्वर महादेव मंदिर, सच्चिया माताजी मंदिर, गोगाजी का मंदिर, हनुमानजी का मंदिर, खेतलाजी का मंदिर, 52 वीरो का मंदिर, धोणोरी री वीर, मामाजी का मंदिर, शंकर भगवान का मंदिर, हिंगलाज माताजी का मंदिर, सधी माता जी का मंदिर, विद्या की देवी मॉ सरस्वती, प्रागौङ पर्वत पर गंगा माई उद्गम स्थल, शीतला माताजी, आशापुरा, चामुंडा माताजी, नैनका छोकरो रे हनुमान का मंदिर स्थित हे। जालौर सिरेमंदिर के गादीपति श्री श्री 1008 श्री गंगानाथजी महाराज की जन्म भूमि भी देवनगरी दांतवाङा हे। इस पावन धरा पर ऐसे कई संत महात्माऔ ने इस धरा पर जन्म लिया हे। प्रसिध्द विभिन्न ऐतिहासिक पर्व जैसे होली, दिवाळी, शिवरात्रि, रामदोव जी मेला, नवरात्रि महोत्सव, आखातीज, कानुङा त्योहारो पर इस गांव के छत्तीस कॉम के लोग एक जाजम पर एकत्रित होते हे इस सभी पर्वो को इस देवनगरी दांतवाङा में बहुत ही ऐतिहासिक तरीके मनाया जाता हे। इसलिऐ उसका नाम देवनगरी के नाम से विख्यात हे। इस गांव के लोग जीवन मे धर्म का मूल आधार मानते हुए  जब तक व्यक्ति अपने धर्म पर चलते हुए अच्छे और समाज हित मे कार्य करता है तो यह सब उनके अच्छे कर्मो का फल है। उन्होने हर व्यक्ति को अपने धर्म पर चलने की बात आपस मे कहते हे। मनुष्य के साथ मरने तक जो चीज साथ रहती है वो धर्म है तो हमे इस मनुष्य रुपी देह मे अच्छे और धार्मिक कार्य करके इस जीवन को सफल बनाने का कार्य करने का आह्वाने करते है